
आज समय की मांग है “आर्थिक न्याय” जिसे गरीबी रेखा नहीं बल्कि अमीरी रेखा बना कर ही स्थापित किया जा सकता है। आर्थिक न्याय का मतलब हे देश की अर्थव्यवस्था से मिलने वाले शुद्ध अतिरिक्त लाभ का पूरे समाज मेँ समान वितरण। वर्तमान अर्थव्यवस्था मेँ इस अतिरिक्त लाभ का दोषपूर्ण वितरण होने के कारण पूरा समाज अनेक गंभीर आर्थिक, सामाजिक ओर राजनीतिक समस्याओं से घिरा हुआ है जिसके कारण समाज एक आदर्श स्थिति की ओर नहीँ बढ पा रहा हे। कुछ मुट्ठीभर लोगों के पास ही सारा लाभ जमा हो रहा है और उससे समाज में भारी असंतोष भी पनप रहा है। आज भारी मात्रा मेँ उत्पादन होने के बाद भी बहुसंख्या में लोग गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी का जीवन जीने को मजबूर हैं। इसलिए अब व्यापक मानव हित में झूठ पर टिकी वर्तमान जटिल अर्थव्यवस्था के स्थान पर बेहद सरल और न्याय पर आधारित अर्थव्यवस्था ही स्वीकार की जानी चाहिए। यही एक सबसे आदर्श व्यवस्था सिद्ध होगी जो अब समय की मांग भी है और कई जटिल समस्याओं से समाज को छुटकारा दिलाने का रास्ता भी।
Page Count:
128
Publication Date:
2015-03-10
ISBN-10:
9385167154
ISBN-13:
9789385167157
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