
<p> अंधकार में इक दीप जलाया</p><p> झिलमिल करता दीप जलाया</p><p> आशाओं का नवरूप जगाया</p><p> स्वप्नों का झिलमिल रूप सजाया</p><p> मन के कुछ अँधियारे कोने</p><p> कुछ काले कुछ बेरंग कोने</p><p> साँझ की थकी धूप अनमनी</p><p> तरुण चाँद की दुग्ध चाँदनी</p><p> सबकी थोड़ी आभा चुराकर</p><p> छोटी सी इक दुआ मिलाकर</p><p> मन की हर भय शंका हरकर</p><p> विश्वास की स्नेहिल बाती भरकर</p><p> साँझ से ही प्रतीक्षा की मोहक लौ संग</p><p> मन के विस्मृत प्रिय संसार सार संग</p><p> जग का हर दर्द कुछकुछ भूला सा</p><p> रात्रि के अँधियारे में खोयाखोया सा</p><p> जीवन की हर धूपछाँव संचित पौ बन</p><p> अस्थिर सुखदुःख की कंपित लौ बन</p><p> रात्रि की कालिमा में सबल उजास बन</p><p> सदा रहे जगमग दीप लघु खद्योत बन!!</p><p> —इसी पुस्तक से</p>
Page Count:
168
Publication Date:
2021-01-19
ISBN-10:
9383111623
ISBN-13:
9789383111626
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