
दोस्तों नमस्कार मेरा नाम मुकेश सिह है मेरा ये सौभाग्य है कि मैं आपके पास इस किताब के माध्यम से पहुँच पाया। मैं आपके पास कुछ अहम बातें सांझा करने आया हूँ । और बो बातें सांझा करना जरूरी है क्योंकि मेरी उम्र 30 वर्ष है, होश संवारने के बाद मैंने जिंदगी के बहुत उतार चढाव देखे है। लेकिन आज हम जिस मुद्दे पर बात करेंगे वो मुद्दा अलग है। और वो मुद्दा है सफलता का, जब हम इस शब्द पर बात करते है, तो हर व्यक्ति अपने आपको अपनी जिंदगी में कहीं न कहीं असफल समझता है, तो इसका मतलब ये नहीं कि वो सफल नहीं हो सकते है, और सोचने वाली बात है कि जो सफल हो रहे है क्या दूसरी दुनिया से आये है, उनके पास ज्यादा ताकत है, ज्यादा दिमाग है, ज्यादा पैसा है, नहीं वो सामान्य लोग ही थे। मैं सफल लोगों पर बात नहीं करने नहीं आया हूँ मैं बात करूंगा कि लोग असफल क्यों होते है। लोग क्यों अपने लक्ष्य से भटक रहे है या फिर लक्ष्य ही नहीं बना पा रहे है। दोस्तों मैंने बहुत सारे युवाओं से उनके आगामी जिंदगी के बारे में चर्चा की और जाना कि उनका कोई लक्ष्य ही नहीं है। या हम दूसरे शब्दों में कहे अस्थिर मानसिकता से काम कर रहे है। मैंने देखा हमारे युवा अपने में बहुत प्रतिभाएं संजोए बैठे है। यदि वो ठान लें तो कुछ भी कर सकते है। मैंने उनसे चर्चा कर जाना कि वो किसी डर से डर रहे है और इससे निकल नहीं पा रहे है। और यदि वो इस डर से निकल गए तो उनके लिए कुछ भी संभव है।
Page Count:
149
Publication Date:
2022-01-01
ISBN-10:
9394088113
ISBN-13:
9789394088115
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